गढ़वाली पवित्र मन्दिर

गढ़वाली मंदिरन की ऐतिहासिक जड़ि बहुत गहरी छन। इन मंदिरन मां अक्सर प्राचीन कथाएँ मिलन छन, जैंस पांडवन द्वारां बनाय गयां मंदिर (जैस बिनसर महादेव), इलाकाई लोककथाएँ जैंस धारी देवी की बदलती मूर्ति, अर सदियन पुराण गढ़वाल राज्यूँक इतिहास देखौंण वाली स्थापत्य शैली आपस मां मिलि जांदी छन। इन मंदिरन मां पुराण पत्थर अर बाद मां करि गयां जीर्णोद्धार दख्यां छन। जादातर ई मंदिर स्थानीय देवता (कुलदेवता) अर भगवान शिव-पार्वती जैस प्रमुख देवतान कु समर्पित छन। इन मंदिरन मां पौराणिक उत्पत्ति सूं लिकि गोरखा आक्रमण अर अंग्रेजी प्रभाव तक, समय अर आध्यात्मिक महत्व की कई परतें दख्यां छन।

गढ़वाली मंदिर इतिहास का मुख्य पहलू

पौराणिक उत्पत्ति:
कई मंदिर महाभारत जैस महाकाव्यान सूं जुड़ा छन। मान्यता छन कि पांडवन इन मंदिरन कु निर्माण कर्यू (जैस बिनसर महादेव, जिक एक रात मां बनण कु विश्वास छन) या देवता खुद प्रकट हुयां (स्वयं प्रकट शिवलिंग)।

स्थानीय देवता (कुलदेवता):
गढ़वाली संस्कृति कुलदेवतान अर रक्षक देवतान पर आधारित छन, जैंस कंडोलिया देवता (शिव)। इन देवतान कु मंदिर सामुदायिक जीवन कु जरूरी हिस्सा छन अर प्रकृति स्यां घुलि-मिलि जांद छन।

प्राचीन अर मध्यकालीन निर्माण:
देवलगढ़ मां गौरा देवी मंदिर (7वीं सदी) जैस मंदिर बहुत पुराण छन, जौं प्रारंभिक स्थापत्य शैली दिखांद छन। जागेश्वर (7वीं-14वीं सदी) जैस स्थल मां प्राचीन मंदिरन का बड़ा समूह छन।

गोरखा प्रभाव (1804-1815):
गोरख्यान कु कठोर शासन कारण कई मंदिर नष्ट हुयां। बिनसर जैस स्थानन मां टूटी मूर्तियाँ मिलीं। पर इ प्रभाव कारण आस्था अर मजबूत भई, जैंस धारी देवी मां मान्यता छन कि देवी आपदां सूं रक्षा करंदी छन।

औपनिवेशिक अर स्वतंत्रता बाद का समय:
अंग्रेजी राज मां सड़क, छावनी अर पर्यटन का विकास भयों (जैस लैंसडाउन अर गढ़वाली राइफल्स)। आज़ादी बाद ई विकास अर बढ़्यों, पर बाढ़ अर भूकंप जैस प्राकृतिक आपदां बाद कई बार पुनर्निर्माण करन पड़्यों।

स्थापत्य परतें:
कई मंदिरन मां पुराणी नींव पर नई रचनाएँ बणी छन, जौं सदियन सूं चलि रई पूजा अर समय-समय पर करि गयां पुनर्निर्माण कु प्रमाण छन।

महत्वपूर्ण मंदिरन के उदाहरण

धारी देवी मंदिर:
गढ़वाल की रक्षक देवी। देवी की मूर्ति कु रूप बदलण कु विश्वास छन। 2013 मां मूर्ति स्थानांतरित भई। ई मंदिर गढ़वाली आस्था कु मुख्य केंद्र छन।

जागेश्वर मंदिर:
अल्मोड़ा का पास स्थित 125 पुराण मंदिरन कु समूह। ई एक महत्वपूर्ण शैव तीर्थ स्थल छन।

कंडोलिया मंदिर:
कंडोलिया देवता (शिव) कु समर्पित। साधारण अर पारंपरिक गढ़वाली वास्तुकला मां बना ई मंदिर पुराणी परंपरान स्यां जुड़ा छन।

बिनसर महादेव:
मान्यता छन कि पांडवन इ मंदिर बनायों। इथै पुराणी नागरी लिपि मां लिखे शिलालेख आज भी मिलन छन।

ई मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल ही ना छन, बल्क गढ़वाल कु कठिन इतिहास, सांस्कृतिक विश्वास अर अटूट आध्यात्मिकता का जीवंत प्रमाण छन। ई बात ई-उत्तरांचल जैंस स्रोतां मां भी लिखी मिलंदि छन।

गढ़वाल
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