क्या आज हम लोग अपणी बोलि भाषा अर अपणा रीती रिवाजों तैं भुलणा छां?
मेरा उत्तराखण्डी भै-बैणों, गढ़वळी बोलि की ईं वेबसाइड मा हम आप सभ्यों को स्वागत करद्या।
हमरि ईं वेबसाइड मा आप तैं हमरि गढ़वळी संस्कृति का बारा मा गढ़वळी गीत अर विडियो
अर गढ़वळी बोलि की वणमाला का बारा मा देखणु कू मिललु।
आज को वचन
किलैकि तुम खुद अंधेरा मा रौंदयां, पर जब बट्टी तुम प्रभु का लोग बंणया, तुम उज्यला छा। इलै तुम तैं ऊं लुखुं का जन जींण चयणु च जु उज्यला मा बट्टी जुड़यां छिनी।