हिमालय

क्या आज हम लोग अपणी बोलि भाषा अर अपणा रीती रिवाजों तैं भुलणा छां?  

हिमालय

मेरा उत्तराखण्डी भै-बैणों, गढ़वळी बोलि की ईं वेबसाइड मा हम आप सभ्यों को स्वागत करद्‍या।

हमरि ईं वेबसाइड मा आप तैं हमरि गढ़वळी संस्कृति का बारा मा गढ़वळी गीत अर विडियो

अर गढ़वळी बोलि की वणमाला का बारा मा देखणु कू मिललु।

ब्यो
गढ़वाली चित्र

आज को वचन

किलैकि जु आदिम वचन सूंणि के वेका अनुसार जीवन बसर नि करदो, उ वे आदिम का जन च जु अपड़ा असली मुक ऐना मा दिखदु। अर जब उ अपड़ा मुक देखि के उख बट्टी चलि जांदु, अर वे ही बगत बिसरी जांद कि मि कन दिख्योणु छो।

याकूब 1:23
    Terms & Conditions
    Location

    Your encouragement is valuable to us

    Your stories help make websites like this possible.